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संस्थान के बारे में संक्षिप्त जानकारी

‘हायर स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स’ नामक राष्ट्रीय अनुसंधान  विश्वविद्यालय के  प्राच्य एवं यूरोपीय शास्त्रीय प्राचीनकाल के संस्थान में प्राच्य एवं यूरोपीय शास्त्रीय प्राचीनकाल के अध्ययन से सम्बंधित अनुसंधान एवं अध्यापन कार्य साथ-साथ किए जाते हैं।

संस्थान की विशेषताएँ:

 

  • हमारे संस्थान में प्राच्य अध्ययन, प्राचीन यूरोपीय भाषाशास्त्र तथा पुरातन इतिहास के विशेषज्ञों के सम्मिलित अनुसंधान की बदौलत बहुरूप अंतर्विषयक शोध विकसित किये जाते हैं।
  • हमारे संस्थान में अनुसंधान और अध्यापन के प्रत्येक स्तर पर पुरातन प्राच्य-अध्ययन एवं आधुनिक प्राच्य-अध्ययन से जुड़े शोध कार्यों के पारस्परिक संबंधों पर विशेष ध्यान दिया जाता है|
  • हमारे संस्थान में क्षेत्रों, भाषाओं और परम्पराओं पर किए जाने वाले शोधकार्यों में उनसे सम्बंधित अधिकाधिक  भौगोलिक क्षेत्रों को शामिल किया जाता है|
  • हमारे संस्थान में भाषा-विज्ञान से लेकर संस्कृति-विज्ञान तक के व्यापक क्षेत्र के विषयों पर अनुसंधान कार्य होते हैं|
  • हमारे संस्थान में शिक्षा कार्य वैज्ञानिक अनुसंधान में एकीकृत है|
  • हमारा संस्थान रूसी एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ व्यापक पैमाने पर सहयोग करता है|
  • हमारे संस्थान में प्रकाशन गतिविधि के आधुनिक प्रकारों को प्रयोग में लाया जाता है|

शोध के क्षेत्र

संस्थान के विशेषज्ञ अपने वैज्ञानिक कार्यों में प्राच्य-अध्ययन एवं पुरातन-अध्ययन के परम्परागत क्षेत्रों के अधिकाँश भागों को शामिल करते हैं:

चीन, जापान, कोरिया, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस एवं थाइलैंड, मंगोलिया एवं तिब्बत, ईरान, प्राचीन भारत, मुगलकालीन भारत, वर्तमान भारत एवं पाकिस्तान,  दक्षिण भारत की भाषाएँ एवं संस्कृतियाँ, तुर्की एवं मध्य एशिया के तुर्कभाषी देश, अरब-देश, इथोपिया एवं इरीट्रिया, प्राचीन मेसोपोटामिया, पुराना नियम (Old Testament) एवं उसकी दुनिया, ईसापूर्व दुनिया, सीरियाई एवं नव-आरामाई शोध, प्राचीन यूनान एवं रोम, प्राचीन पूर्व और रूस के पूर्वीय तथा दक्षिण पूर्वीय इलाकों का पुरातत्वशास्त्र।

शोधकार्यों के विषय:

  • प्राच्य पांडुलिपियों तथा ग्रंथों का अनुवाद और टिप्पणी लेखन (दीर्घावधि शोध एवं प्रकाशन योजना “East and Antiquity in Classical Texts”)
  • प्राचीन एवं मध्यकालीन पूर्व की वाङ्मय (बोलियों) पर अनुसंधान
  • पूर्वी देशों के मध्यकालीन साहित्य पर अनुसंधान (मुख्यतः ईरान, भारत, चीन, जापान)
  • प्राच्य एवं पश्चिमी संस्कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन (प्राचीन काल – मध्यकाल – आधुनिक काल)
  • प्राचीनकाल एवं आधुनिककाल के पूर्वी देशों तथा अफ़्रीका की भाषाओं का तात्कालिक एवं तुलनात्मक-ऐतिहासिक वर्णन (सामी, भारत-यूरोपीय, अल्ताई, चीनी-तिब्बती और इंडोचायना की भाषाएँ)
  • प्राच्य देशों की मिथक-विद्या, लोक-धर्म एवं लोक कथाओं के क्षेत्रों में शोध (क्षेत्र कार्य, परिणामों का विश्लेषण और प्रकाशन)
  • प्राच्य एवं यूनानी पुरातत्वशास्त्र

प्रकाशन

संस्थान के शोधकर्ताओं को Web of Science और Scopus जैसी ग्रंथसूचियों में शामिल अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशन का बड़ा अनुभव है| उनके लेख Brill, de Gruyter, Oxford University Press जैसी विश्व की बड़ी प्रकाशन संस्थाओं में छापे जाते हैं।

संस्थान की वैज्ञानिक योजनाएँ:

  • Orientalia et Classica ग्रंथमाला का प्रकाशन (इसके अब तक कई  ग्रंथ प्रकाशित किए जा चुके हैं)
  • Orientalia et Classica अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका का प्रकाशन
  • अंतरराष्ट्रीय मान्यता-प्राप्त प्रकाशन संस्थाओं में वैज्ञानिक संग्रहों और निबंधों का प्रकाशन
  • Eisenbrauns अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्था के सहयोग से Babel und Bibel श्रृंखला प्रकाशित की जाती है, जो Web of Science और Scopus में शामिल है
  • Gorgias Press प्रकाशन संस्था के सहयोग से The Journal of Language Relationship पत्रिका प्रकाशित की जाती है (ज़्यादातर लेख अँग्रेज़ी भाषा में हैं)
     

संस्थान के विभाग:


संस्थान में निम्नलिखित शैक्षिक कार्यक्रम क्रमबद्ध तरीके से अमल में लाये जाते हैं:

  • प्राचीन इज़राइल का इतिहास एवं बाइबिल अध्ययन
  • भारतीय भाषाएँ एवं साहित्य
  • ईरानी भाषा एवं साहित्य
  • चीनी भाषा एवं साहित्य
  • इंडोचायना और दक्षिण पूर्व एशिया की भाषाएँ एवं साहित्य
  • जापानी भाषा एवं साहित्य
  • कोरियाई भाषा एवं साहित्य
  • प्राचीन मेसोपोटामिया की भाषाएँ एवं साहित्य
  • प्राचीन सीरिया और फ़िलिस्तीन की भाषाएँ एवं साहित्य
  • इथियोपियन एवं अरबी भाषाशास्त्र
  • अरब देशों की भाषा एवं साहित्य
  • भारतीय भाषाएँ एवं साहित्य (तमिल और संस्कृत)
  • भारत और मुस्लिम दक्षिण एशिया की भाषाएँ एवं साहित्य (उर्दू और फ़ारसी)
  • मंगोली और तिब्बती भाषाएँ एवं साहित्य
  • तुर्कभाषीय देशों की भाषाएँ एवं साहित्य
  • प्राचीन यूनान एवं रोम का इतिहास
  • यूरोपीय प्राचीनकाल का भाषाशास्त्र

 

भाषाएँ, जिन का अध्यापन और अनुसंधान संस्थान में किया जाता है:

सुमेरी, अकादी, उगरितिक, फोएनिसियन, प्राचीन इब्रानी, प्राचीन आरामाई भाषाएँ, सीरियन, नव-आरामाई भाषाएँ (इन में टुरोयो भी), Hurrian भाषा, हित्ती, प्राचीन इथियोपियान, अरबी साहित्यिक भाषा और उपभाषाएँ, अम्हारिक, तिग्रीन्या भाषा, सोकोत्री भाषा, संस्कृत, हिंदी, पाली, प्राकृत, लद्दाखी, तमिल, आधुनिक फ़ारसी, प्राचीन फ़ारसी, उर्दू, चीनी, प्राचीन चीनी, जापानी, साहित्यिक जापानी, कोरियाई, वियतनामी, थाई, लाओ, ख्मेर, मंगोली, तिब्बती, चग़ताई, पुरानी तुर्की, ओस्मानी तुर्की, तुर्की, प्राचीन यूनानी, लातिन, अनातोलियन, अल्ताई, तुषारी, काकेशसी, चीनी-तिब्बती, ऑस्ट्रो-एशियाई, द्रविड़, चुकोत्को-कम्चात्कन, येनिसेअन, खोईसान.
 

वैज्ञानिक गतिविधियाँ

संस्थान के वैज्ञानिक अनुसंधान के मुख्य क्षेत्र:

  • प्राचीन पूर्व; आरामाई भाषाएँ, इतिहास और संस्कृति; सामी भाषाओं का तुलनात्मक अध्ययन; दक्षिण-अरब  की भाषाओं और लोक कथाओं का वैज्ञानिक शोध
  • तुलनात्मक भाषाविज्ञान: सुदूर भाषाओं के आनुवंशिक संबंधों पर शोध, भाषाओं के वंशिक वर्गीकरण की मात्रात्मक प्रणाली
  • प्राचीन यूनान एवं रोम का भाषाशास्त्र और इतिहास: भाषाएँ, साहित्य, मिथकीय कथाएँ, साम्राज्यों और कौमों का इतिहास
  • मध्यपूर्व हेलेनिस्टिक कालखंड में; सीरो-फिलिस्तीनी क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्रोत (युग परिवर्तन काल और मध्यकाल के दौरान)
  • भारत, ईरान, मंगोलिया एवं तिब्बत की पांडुलिपियों तथा ग्रंथों; बौद्ध भाषाशास्त्र; फ़ारसी भाषा एवं साहित्य; साहित्य की विधाओं का अनुसंधान
  • सुदूर पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया: इतिहास, संस्कृति, भाषाएँ, साहित्य, मिथकीय और लोक कथाएँ, रीति रिवाज (चीन, जापान, कोरिया, वियतनाम, कम्बोडिया, लाओस, थाईलैंड)
  • संस्कृतियों का तुलनात्मक एवं अंतर्विषयक अनुसंधान

 

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